15 Oct 2026
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क्या प्रशासन तय करेगा शंकराचार्य कौन? : शंकराचार्य बनाम प्रशासन: माघ मेले में नोटिस से बढ़ा विवाद

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उत्तरप्रदेश : प्रयागराज माघ मेले में रथ रोकने के विरोध में धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया है।

माघ मेला प्राधिकरण ने उनसे 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे किस आधार पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य बता रहे हैं।

सोमवार रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार शंकराचार्य के शिविर पहुंचे और नोटिस लेने को कहा, लेकिन शिष्यों ने देर रात होने का हवाला देकर नोटिस लेने से इनकार कर दिया। मंगलवार सुबह कानूनगो दोबारा शिविर पहुंचे और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को आदेश दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक किसी को शंकराचार्य घोषित नहीं किया जा सकता और न ही पट्टाभिषेक किया जा सकता है।

प्रशासन का आरोप है कि इसके बावजूद अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले में अपने शिविर के बोर्ड पर खुद को “ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य” लिखा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। इसी पर 24 घंटे में जवाब मांगा गया है।

वहीं, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस को प्रशासनिक हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य ही कर सकते हैं, न कि प्रशासन या संवैधानिक पदों पर बैठे लोग।

उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगेगा, वे आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे और हर माघ मेले में फुटपाथ पर रहेंगे।

वही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से फोन पर बात की हैं और मिलने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि वे जल्द प्रयागराज आएँगे। उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बात कर समर्थन जताया और कहा कि वे उनसे जल्द व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए प्रयागराज आएँगे।

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